वो नही मिला तो मलाल क्या, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं बे-फ़ाएदा अलम नहीं बे-कार ग़म नहीं तौफ़ीक़ दे...
My Life Shayari: अपनी हैरत गंवा चुका हूँ मैं, अमरदीप सिंह ‘अमर’ शब की बाहों में है निढाल कोई काश पूछे न हाल-चाल कोई बे-ज़रूरत सी ...
घर की फ़ज़ा को चुप सी लगी थी दफ़्तर में ख़ामोशी थी। जो दर खोला ऐसा खोला दर दर में ख़ामोशी थी। कल की रात ऐसी...
पहले सबको ज़ख़्म दिखाना पड़ता है फिर पलकों से नमक उठाना पड़ता है ख़ुद से ख़ुद तक दूरी तो है मामूली बीच में लेकिन एक ज़माना...